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body ko natural tareeke se heal kaise kare

  अपनी बॉडी को नेचुरल तरीके से कैसे हील करें Natural Body Healing in Hindi – सम्पूर्ण गाइड आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसान बाहर से जितना स्वस्थ दिखता है, अंदर से उतना ही कमजोर होता जा रहा है। गलत खानपान, तनाव, नींद की कमी, मोबाइल-लाइफस्टाइल और प्रदूषण ने शरीर की Natural Healing Power को कमजोर कर दिया है। नतीजा यह है कि छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी हम दवाओं पर निर्भर हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारा शरीर खुद को ठीक करने की अद्भुत क्षमता रखता है? जरूरत है केवल उसे सही माहौल, सही भोजन और सही जीवनशैली देने की। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि अपनी बॉडी को प्राकृतिक तरीके से कैसे हील करें , बिना ज्यादा दवाइयों के, बिना साइड इफेक्ट के। Natural Healing क्या है? Natural Healing का अर्थ है – शरीर को ऐसे पोषण, आदतें और वातावरण देना जिससे वह खुद ही बीमारी से लड़ सके और खुद को रिपेयर कर सके । हमारा शरीर: घाव भरता है इन्फेक्शन से लड़ता है कमजोर कोशिकाओं को ठीक करता है हार्मोन बैलेंस करता है 👉 यह सब अपने-आप करता है, अगर हम उसे रोकें नहीं। शरीर की Natural Healing Power को कमज...

पित्रों को कैसे प्रसन्न करे pitro ko kese praesanne kare

पितृ पक्ष में पितरों को कैसे प्रसन्न करें?  परिचय भारतीय संस्कृति में पितरों का विशेष महत्व है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है – “पितृ देवो भव” अर्थात् पितरों को देवता के समान सम्मान देना चाहिए। हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक 16 दिनों की अवधि को पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष कहा जाता है। यह समय अपने पूर्वजों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने का होता है। माना जाता है कि इस दौरान पितृ लोक के द्वार खुल जाते हैं और हमारे पूर्वज पृथ्वी पर आकर अपने वंशजों का आशीर्वाद देते हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि – 👉 पितरों को प्रसन्न करने के लिए हमें क्या करना चाहिए? 👉 पितृ पक्ष में कौन से कार्य शुभ होते हैं और किनसे बचना चाहिए? 👉 कौन-सी धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताएँ इससे जुड़ी हैं? आइए जानते हैं विस्तार से। पितृ पक्ष का महत्व पितृ पक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारे जीवन की नींव उन्हीं के संस्कारों और आशीर्वाद पर टिकी है। श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करने से पितर तृप्त होते हैं और घर-परिवार पर सुख-समृद्धि ...

सावन में भोले बाबा को कैसे प्रसन्न करें – आसान उपाय और व्रत विधि

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  सावन का महीना और भगवान शिव की महिमा   हिन्दू धर्म में सावन का महीना (श्रावण मास) बहुत ही पवित्र और धार्मिक महत्व रखता है। यह महीना पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है। सावन के दौरान भक्तगण विशेष पूजा-पाठ, व्रत और रुद्राभिषेक करते हैं ताकि शिवजी की कृपा उन पर बनी रहे। मान्यता है कि सावन में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है और मनोकामना शीघ्र पूर्ण होती है। आज के लेख में हम आपको बताएंगे – सावन में भोलेनाथ को कैसे प्रसन्न करें, कौन-कौन से उपाय और व्रत शिवजी के प्रिय माने जाते हैं, सावन के महत्व और विशेष उपाय जिनसे आपका जीवन खुशियों से भर जाएगा। 📌 सावन का धार्मिक महत्व सावन का महीना मुख्यतः वर्षा ऋतु में आता है और इस समय प्राकृतिक वातावरण बेहद शुद्ध और आध्यात्मिक हो जाता है। इस महीने की खास बातें: ✅ समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने विषपान किया था। ✅ इस महीने शिवजी की आराधना करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। ✅ हर सोमवार (श्रावण सोमवारी) को व्रत करने से मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। ✅ शिव पुराण में कहा गया है कि सावन में भोलेनाथ जल्दी प्रसन्न होते हैं। 📌 सा...

समोसा, जलेबी और पिज़्ज़ा सेहत के लिए कितना खतरनाक है? जानिए पूरी सच्चाई

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  प्रस्तावना आज के समय में फास्ट फूड और तले-भुने व्यंजनों का क्रेज़ दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। समोसा, जलेबी और पिज़्ज़ा जैसे स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ हमारे रोज़मर्रा के खान-पान का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन चीज़ों का आपकी सेहत पर कितना बुरा असर पड़ सकता है? इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि समोसा, जलेबी और पिज़्ज़ा आपकी सेहत के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं, किन बीमारियों का कारण बनते हैं और कैसे आप इनसे बच सकते हैं। समोसा – स्वाद का जाल या स्वास्थ्य का दुश्मन? समोसे में क्या होता है? समोसा मुख्यतः मैदे से बनाया जाता है जिसमें आलू, मटर या अन्य मसालेदार भरावन होता है। इसे तेज़ तेल में डीप फ्राई किया जाता है जिससे इसका स्वाद लाजवाब हो जाता है लेकिन सेहत के लिए खतरनाक बन जाता है। समोसे से होने वाले नुकसान अधिक कैलोरी : एक समोसे में लगभग 250-300 कैलोरी होती है जो वजन बढ़ाने का कारण बनती है। ट्रांस फैट : बार-बार एक ही तेल में तला गया समोसा शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है। पाचन तंत्र खराब करता है : ज्यादा तला हुआ खाना पेट में गैस, एसिडिटी और कब्...

devshyani ekashi 2025 देवशयनी एकादशी 2025: महत्व, व्रत कथा, पूजा विधि एवं लाभ

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देवशयनी एकादशी 2025: महत्व, व्रत कथा, पूजा विधि एवं लाभ भूमिका हिंदू धर्म में एकादशी का अत्यंत विशेष महत्व होता है। हर माह में दो एकादशी तिथि आती हैं, जिनमें से आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इसे हरिशयनी एकादशी , पद्मा एकादशी या आषाढ़ी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के शयन पर जाने का प्रतीक होता है और इस दिन से चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि देवशयनी एकादशी क्या है, इसका धार्मिक महत्व, व्रत कथा, पूजन विधि और इस दिन व्रत करने से मिलने वाले लाभ। देवशयनी एकादशी क्या है? (What is Devshayani Ekadashi?) देवशयनी एकादशी आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आती है। इस दिन से भगवान विष्णु पाताल लोक में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार माह तक वहीं विश्राम करते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहते हैं। इसी दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन आदि मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। इस तिथि को भगवान विष्णु का पूजन करना, व्रत रखना और भगवान विष्णु के नाम का जाप करना विशेष पुण्यदायी होता...

विश्व योग दिवस 2025

                    विश्व योग दिवस  परिचय हर साल 21 जून को पूरी दुनिया में 'विश्व योग दिवस' (International Yoga Day) मनाया जाता है। यह दिन योग की प्राचीन भारतीय परंपरा को सम्मानित करने, उसके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों को वैश्विक स्तर पर फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है! योग आज न केवल भारत, बल्कि विश्व के हर कोने में स्वास्थ्य, शांति और एकता का प्रतीक बन चुका है। योग का इतिहास और उत्पत्ति योग की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है। 'योग' शब्द संस्कृत के 'युज' धातु से आया है, जिसका अर्थ है 'जोड़ना' या 'एकीकृत करना'। योग का उद्देश्य मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित करना है। पूर्व वैदिक काल (3000 ईसा पूर्व से पहले): हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की खुदाई में योग मुद्राओं के प्रमाण मिले हैं, जिससे पता चलता है कि योग का चलन 5000 साल पहले भी था। वैदिक काल (3000 ईसा पूर्व से 500 ईसा पूर्व): इस काल में एकाग्रता और कठिनाइयों से पार पाने के लिए योगाभ्यास किया जाता था। ऋग्वेद में भी योग का उल्लेख मिलता है। पूर्वशास्त्रीय...
🩺 बाहर का खाना-पीना कैसे कर सकता है लिवर को खराब? जानें कारण, लक्षण और बचाव के तरीके 🔍 परिचय: गर्मी और बारिश के मौसम में लिवर संक्रमण की समस्या तेजी से बढ़ जाती है। दूषित खाना, अनहाइजीनिक पेयजल, फास्ट फूड और तैलीय पदार्थों के सेवन से लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है। यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो लिवर इंफेक्शन, हेपेटाइटिस और यहां तक कि फैटी लिवर की स्थिति भी बन सकती है। ⚠️ लिवर को नुकसान पहुंचाने वाले मुख्य कारण: बाहर का तला-भुना खाना और फास्ट फूड गंदा पानी पीना या खुले में कटे फल खाना तेज़ धूप और गर्मी में हाइड्रेशन की कमी वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण (जैसे हेपेटाइटिस ए, ई) ज्यादा फैट और नमक वाला भोजन 🛡️ लिवर को स्वस्थ रखने के लिए उपाय: 🥗 1. संतुलित और पोषक आहार लें मौसमी फल, हरी सब्जियाँ और फाइबर युक्त भोजन खाएं प्रोटीन की सीमित मात्रा (70-80 ग्राम प्रतिदिन) का सेवन करें फैट और नमक की मात्रा कम रखें 💧 2. शुद्ध पानी पिएं दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं उबालकर या फिल्टर किया गया पानी ही पिएं 🧘‍♂️ 3. योग और व्यायाम करें ताड़ासन, पश्चिमोत्तानासन ...